संवाददाता संचिता सुषमा वाल्के 

इक्कीसवीं सदी के लौह पुरुष: संगठन महारथी अमित शाह- विशेष लेख

पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया है—
“यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।”
यानी समाज श्रेष्ठ व्यक्तियों के आचरण का अनुसरण करता है।
भारतीय राजनीति में यह वाक्य आज जिस व्यक्तित्व पर सर्वाधिक सटीक बैठता है, वह हैं केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह—जिन्होंने संगठन, समर्पण और पुरुषार्थ से अपने को "इक्कीसवीं सदी का लौह पुरुष" सिद्ध किया है।

बचपन से भारतीय दर्शन की ओर झुकाव

22 अक्टूबर 1964 को मुंबई में जन्मे अमित शाह की प्रारंभिक शिक्षा मानसा (गुजरात) में हुई। बचपन से ही वे भारतीय शास्त्रों, व्याकरण और महाकाव्यों का अध्ययन करते रहे। उनकी माँ कुसुमबेन ने उनमें खादी, स्वदेशी और राष्ट्रभाव का संस्कार डाला।

संघ से जुड़कर राष्ट्रभाव की नींव

आपातकाल के बाद 1977 में मात्र 13 वर्ष की आयु में वे पोस्टर-बैनर लगाते हुए चुनावी प्रचार में उतरे। इसी समय उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव हुआ, जिसने उनके व्यक्तित्व में सेवा, तप और राष्ट्रभाव के बीज रोपे। 1980 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और 1982 में एबीवीपी गुजरात के संयुक्त सचिव बने। 1984 में भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता बढ़ी और 1987 में युवा मोर्चे से जुड़कर उन्होंने संगठन कौशल का प्रदर्शन किया।

राजनीति में तेज उभार

1989 में वे भाजपा के अहमदाबाद नगर सचिव चुने गए। 1995 में गुजरात वित्त विकास निगम के अध्यक्ष बने और घाटे में चल रहे निगम को 214% लाभ में परिवर्तित कर दिया—उनके संगठन कौशल का यह पहला बड़ा प्रमाण था। 1997 में उन्हें भाजपा युवा मोर्चा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 1997 के उपचुनाव में वे सरखेज विधानसभा से भारी बहुमत से जीतकर विधायक बने और 2017 तक लगातार विजयी होते रहे।

अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक में ऐतिहासिक बदलाव

36 वर्ष की उम्र में वे जिले के सहकारी बैंक के सबसे युवा अध्यक्ष बने और बैंक को घाटे से निकालकर मुनाफ़े में ला दिया—यह आज भी सहकारिता मॉडल का आदर्श उदाहरण माना जाता है।

गुजरात सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ

2002 से 2010 तक वे गुजरात सरकार में कई प्रमुख विभागों के मंत्री रहे। उनके सुझाव पर गुजरात के सभी प्राथमिक विद्यालयों में शतरंज शिक्षा लागू की गई, जिसे बच्चों के मानसिक विकास के लिए क्रांतिकारी कदम माना गया।

राष्ट्रीय राजनीति में अभूतपूर्व योगदान

2013 में उन्हें भाजपा महासचिव बनाते हुए उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया। उनकी रणनीति ने 2014 में यूपी में भाजपा को 73 सीटों पर ऐतिहासिक विजय दिलाई—जो केंद्र की मोदी सरकार की नींव का निर्णायक आधार बना। जुलाई 2014 में वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और 11 करोड़ सदस्यों के साथ भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनाया। संगठन में कार्यालयों, ई-लाइब्रेरी, प्रकल्पों और विभागीय ढांचे को मजबूत करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

गृहमंत्री के रूप में ऐतिहासिक निर्णय

2019 में गृह मंत्री बनने के बाद उन्होंने कई युगांतकारी कदम उठाए—

धारा 370 व 35A का निष्प्रभावीकरण

कश्मीर में शांति व विकास के नए अध्याय की शुरुआत

पूर्वोत्तर में ऐतिहासिक समझौते—ब्रू-रियांग, बोडो—और सीमाविवाद समाधान

नक्सलवाद को 126 जिलों से घटाकर सिर्फ 11 जिलों तक सीमित किया

आंतरिक सुरक्षा में जीरो टॉलरेंस नीति

2021 में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और 2 लाख से अधिक सहकारी समितियों का गठन

इक्कीसवीं सदी के लौह पुरुषअमित शाह न केवल भाजपा के सर्वश्रेष्ठ संगठनकर्ता माने जाते हैं, बल्कि

— कश्मीर में 70 वर्षों का विवाद
— पूर्वोत्तर के जटिल मुद्दे
— आधी सदी पुराने नक्सलवाद
जैसे राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान कर उन्होंने स्वयं को आधुनिक भारत का लौह पुरुष, “Iron Man of 21st Century” के रूप में स्थापित किया है। वह सरदार वल्लभभाई पटेल के सच्चे अनुयायी माने जाते हैं और उनके संगठन कौशल, राष्ट्रवादी दृष्टि तथा निर्णय क्षमता ने देश की राजनीति में एक नया अध्याय लिखा है।