भारत: भौगोलिक विस्तार में विश्व का सातवाँ स्थान—गौरव, विविधता और संभावनाओं की कहानी
संचिता सुषमा वालके
भारत: भौगोलिक विस्तार में विश्व का सातवाँ स्थान—गौरव, विविधता और संभावनाओं की कहानी
विश्व मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला न केवल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध है, बल्कि भौगोलिक विस्तार के मामले में भी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत दुनिया का सातवाँ सबसे बड़ा देश है, जो अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। लगभग 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला यह देश विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का करीब 2.4 प्रतिशत हिस्सा समेटे हुए है। यह तथ्य केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की विविधता, संसाधनों और संभावनाओं की व्यापकता को भी दर्शाता है। उत्तर में हिमालय की ऊँची पर्वत श्रृंखलाएँ, दक्षिण में विस्तृत तटीय क्षेत्र, पश्चिम में थार का मरुस्थल और पूर्व में हरे-भरे वन—यह विविध भू-आकृतिक संरचना भारत को प्राकृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध बनाती है। इतना विशाल क्षेत्रफल भारत को न केवल जैव-विविधता के लिहाज से विशेष बनाता है, बल्कि कृषि, खनिज संसाधनों और जलवायु विविधता के क्षेत्र में भी इसे विशिष्ट पहचान दिलाता है। यही कारण है कि भारत को ‘विविधताओं का देश’ कहा जाता है, जहाँ हर क्षेत्र अपनी अलग भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान रखता है। हालाँकि, इस विशाल भौगोलिक विस्तार के साथ अनेक चुनौतियाँ भी जुड़ी हुई हैं। जनसंख्या का दबाव, संसाधनों का संतुलित उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय असमानताएँ—ये सभी मुद्दे नीति-निर्माताओं के लिए लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में आवश्यक है कि इस विशाल भूभाग का उपयोग संतुलित और सतत विकास के दृष्टिकोण से किया जाए। वर्तमान समय में, जब वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट गंभीर रूप ले रहे हैं, भारत की भौगोलिक स्थिति और विस्तार इसे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर भी प्रदान करता है। सतत विकास, हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भारत के प्रयास न केवल देश के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं। अंततः कहा जा सकता है कि क्षेत्रफल के आधार पर विश्व में सातवाँ स्थान प्राप्त करना भारत के लिए गर्व का विषय तो है ही, साथ ही यह एक जिम्मेदारी भी है ऐसी जिम्मेदारी, जिसमें इस विशाल भूमि की समृद्धि को बनाए रखते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संतुलित और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना शामिल है।
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